80- भूखा और भयभीत

मेरा सिर ऐसा क्यों लग रहा है जैसे कोई हथौड़े से ठोक-ठोककर मार रहा हो? और मुझे उल्टी-सी क्यों आ रही है? मेरी आँखें जैसे चिपककर बंद हो गई हों, मगर मैं जबरदस्ती एक आँख खोलती हूँ। कमरे की धुंधली-सी रोशनी पड़ते ही मैं तुरंत उसे फिर से भींचकर बंद कर लेती हूँ, दर्द से कराह उठती हूँ। उफ़, मैं कितनी बुरी हाल...

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