अध्याय 416

कायलन

वादे के मुताबिक, हम लोग फूलों के बगीचे में आ ही गए थे। वहाँ काफ़ी सन्नाटा था। न व्यस्त सड़कों की आवाज़, न चिल्लाते लोग, न जिज्ञासु निगाहें, न ताक-झाँक करती आँखें।

बस हम थे और पहरेदार, जो सम्मानजनक दूरी पर खड़े थे।

मैं भी थोड़ा हटकर खड़ा था, हाथों में एक पत्ती को बेवजह उलट-पलट करते हुए जैस...

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