पॉलिसी

रोमानी

“उठो, बेबी… किसी को तुम्हारा ध्यान चाहिए।”

एक ऐसी आवाज़ मुझे बेहद सुकूनभरे सपने की गिरफ्त से झटके में खींच बाहर निकालती है, जो न सिर्फ मेरे अंदर तक हलचल मचा देती है और मेरे बीचोंबीच गर्मी भर देती है, बल्कि आग भी भड़का देती है। मेरी देह अब उम्मीद से थरथरा रही है—सुबह-सुबह वाले चरमसुख के ...

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