अध्याय 183 - भगदड़

मार्गोट का नज़रिया

काफ़ी देर तक... मैं हिली ही नहीं।

मैं ठीक वहीं पड़ी रही जहाँ बाथरूम के फ़र्श पर ढहकर गिर गई थी, अपने आप में सिमटी हुई, जैसे कोबान अभी किसी भी पल दरवाज़ा खोलकर वापस आएगा, मुझसे माफ़ी माँगेगा और कहेगा कि वो सब ठीक कर देगा...

लेकिन ज़ाहिर है, वो कभी नहीं आया।

वो कभी आएगा भी नहीं....

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