अध्याय 31 - द सरफेस

मार्गो की नज़र से

उस आदमी ने मुझे… आँख मारी!

हल्की‑सी।

बहुत जल्दी।

लगभग न के बराबर।

लेकिन इतनी सच्ची कि बस मैं ही उसे देख पाई…

ऐसा लगा जैसे उसे ठीक‑ठीक पता हो कि वो क्या कर रहा है—कि एक इतना छोटा‑सा इशारा कैसे मेरी साँसें अटका सकता है और मेरे दिल को बेवकूफ़‑सी कलाबाज़ियाँ कराने प...

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