ग्रेस टेक द स्टैंड

ट्रिस्टन

अदालत का कमरा आज पहले से छोटा लग रहा था। शायद इसलिए कि इस बार मुझे पता था कि आगे क्या होने वाला है। पहले, शुरुआती सुनवाई में मैं बैठा रहा था, अपना नाम उन इल्ज़ामों के साथ जुड़ता सुनता रहा जिनसे पेट में मरोड़ उठती थी। आज मुझे वहीं बैठकर ग्रेस को—कसम खाकर—अपनी पूरी कहानी सुनानी थी, और उस...

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