अध्याय 100

मेगाफोन की खरखराहट जब थमी, तो वीरान औद्योगिक इलाके में बस हवा की सिसकारी रह गई।

बेंजामिन ज्यों का त्यों खड़ा था—पीठ सीधी, बदन अकड़ा, एकदम स्थिर।

वक़्त सरकता रहा, सेकंड दर सेकंड।

हर गुज़रता सेकंड सोफ़ी की नसों पर यातना बनकर चढ़ रहा था।

वह किसका इंतज़ार कर रहा था?

सोफ़ी जैसे ही अपना आपा खोकर छिपन...

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