अध्याय 109

“तलाक?”

यह शब्द बेंजामिन के कानों से टकराया और उसके सीने में एक तेज़, पीड़ादायक खिंचाव-सा उठ गया।

उसने सिर उठाया। उसकी आँखों में ठंडी, धारदार सख़्ती उतर आई—सीधे ओलिविया पर टिक गई। “ये बात उसने खुद तुम्हें कही?”

बेंजामिन की तीखी निगाह से ओलिविया का दिल काँप उठा।

लेकिन वह तैयारी करके आई थी।

बेंजा...

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