अध्याय 111

बेंजामिन की निगाहें सरगना अपहरणकर्ता पर टिक गईं, और उसका दिमाग़ तेज़ी से दौड़ने लगा।

दो में से एक को चुनो।

यह एक जाल था।

ऐसा जाल, जो वह कोई भी चुनाव करे, उसे खाई में घसीट ही लेता।

“तुम्हें चाहिए क्या?” उसने फिर कहा, आवाज़ बेहद धीमी थी। “पैसा कोई समस्या नहीं। मैं तुम्हें ऐसा आंकड़ा दे सकता हूँ जि...

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