अध्याय 133

बेंजामिन ने धीरे-धीरे अपना चेहरा ऊपर उठाया और ठंडी-सी हँसी के साथ बोला।

उसकी आवाज़ शांत थी—जान पर बनी होने के बावजूद उसमें घबराहट का नामोनिशान नहीं था। उलटे, उसमें तिरस्कार भरा हुआ था। “अल्बर्ट, तूने जेल में कुछ साल काटे थे, है न? अक़्ल तो ज़्यादा नहीं बढ़ी, पर बोलना खूब सीख गया। मैं तो समझता था जे...

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