अध्याय 161

बेंजामिन ने कई गहरी साँसें लीं, तब जाकर वह मुश्किल से अपनी छाती में धधक रहे गुस्से को दबा पाया।

कल रात लौटने के बाद वह ज़रा भी नहीं सोया।

उसके दिमाग़ में बार-बार वही दृश्य घूमता रहा—वह फ्रैंक की तरफ़ दौड़ती हुई—और फ्रैंक के शब्द: “तुम्हारे हाथ में तो बढ़िया बाज़ी थी, लेकिन तुमने उसे बेहद बुरी तरह ...

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