अध्याय 167

सोफी ने अपने सामने सिसकियों से काँपती उस छोटी-सी लड़की को देखा। उन बड़ी-बड़ी आँखों में ऐसी बेबसी भरी थी, जो उसकी उम्र के बच्चे के भीतर नहीं होनी चाहिए थी।

सोफी समझ गई कि यह बेबसी बनावटी नहीं—सचमुच की, भारी और गहरी थी।

“क्या तुम हमें अपने घर ले जा सकती हो?”

छोटी लड़की ने आँसुओं से सना चेहरा उठाया ...

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