अध्याय 231

साइमन की आवाज़ शांत थी।

लेकिन उसकी बातों के साथ उभरी तस्वीरें इतनी ख़ून से सनी थीं कि आसपास की हवा भी गाढ़ी और भारी हो गई—मानो सबका दम घुट रहा हो।

यह सब सुनते ही बेंजामिन का चेहरा मुर्दे-सा पीला पड़ गया।

उसने मुँह खोला, मगर गला इतना सूखा था कि आवाज़ ही नहीं निकली।

वह सफ़ाई देना चाहता था।

वह चीख...

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