अध्याय 233

बेंजामिन को स्टूडियो की इमारत से धक्के मारकर बाहर निकाल दिया गया।

बाहर बारिश थम चुकी थी, मगर नमी से भरी ठंडी हवा उसके जिस्म के आर-पार उतरकर हड्डियों तक में समा रही थी।

वह पूरी तरह भीगा हुआ था। उसकी महँगी सूट-जैकेट कीचड़ भरे पानी से सनी हुई थी और गीले कपड़े उसके शरीर से चिपक गए थे। चेहरे पर पड़े उस...

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