अध्याय 288

सुबह-सुबह।

सूरज की पहली किरण बादलों को चीरती हुई पोर्ट 7 की तटीय हाईवे पर बिखरे तबाह मंजर पर जा पड़ी।

पहाड़ की ढलान जैसे बेरहमी से फट गई थी—बीच में एक विशाल दरार, जिसमें मिट्टी और टूटे पेड़ों की जड़ें खुली हवा में उघड़ी पड़ी थीं। हवा में गीली मिट्टी और खारे समुद्र की मिली-जुली गंध तैर रही थी।

साइ...

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