अध्याय 70

उस नाम ने सोफ़ी की निगाहें वहीं जमाकर रख दीं।

तो वाकई वही थी।

उसका सीना एकाएक खोखला-सा लगने लगा, और भीतर से एक ठंडक रिसकर बाहर आने लगी, जो तेजी से उसके हाथ-पैरों तक फैल गई।

गुस्सा, मन में बैठी कड़वाहट, और उनके बीच कहीं एक दबा हुआ-सा दर्द—सब कुछ एक साथ उसके अंदर उफान मारने लगा।

उसे पहले ही समझ जा...

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