अध्याय 127 पूरे इंटरनेट द्वारा निंदा की गई

अगली सुबह मिरांडा की नींद उसकी फोन की तेज़-तेज़ कंपन से खुली, जो बेडसाइड टेबल पर रखा था।

“भ़्ज़़्ज़़्ज़…”

मिरांडा ने भौंहें सिकोड़ते हुए रज़ाई के नीचे से हाथ निकाला और टटोलकर फोन ढूँढ़ा।

आँखें आधी खोले, स्क्रीन देखे बिना उसने कॉल उठा ली। नींद से उसका गला बैठा हुआ था।

“हैलो?”

दूसरी तरफ़ ल...

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