अध्याय 131 हम तलाकशुदा हैं

अगली सुबह।

मिरांडा की आँख खुली तो पर्दों के बीच से छनकर आती नरम रोशनी कमरे में फैल रही थी। उसकी पलकों ने हल्का-सा फड़फड़ाया; वह धीरे-धीरे आँखें खोल रही थी, दिमाग अब भी नींद की धुंध में डूबा हुआ। वह रज़ाई में गहराई तक सिमटी हुई थी, हिलने का मन ही नहीं था।

लेकिन तभी एक याद बिजली के झटके की तरह उसे आ...

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