अध्याय 157 उनके लिए एक उपहार

अगली शाम, बाहर का आसमान धीरे-धीरे गहराने लगा।

मिरांडा अपने ऑफिस में बैठी आख़िरी दस्तावेज़ निपटा रही थी। उसने हाथ उठाकर घड़ी पर नज़र डाली।

साढ़े छह।

डिनर के लिए निकलने का लगभग वक्त हो गया था।

उसने लैपटॉप बंद किया, खड़ी हुई, और पास रखी कैबिनेट तक जाकर अपने बैग से काले मखमल का एक डिब्बा निकाल लिया।...

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