अध्याय 198 गलतफहमी

लाल ड्रेस वाली औरत ने अपने सामने रास्ता रोककर खड़े उन बड़े-बड़े, खतरनाक आदमियों को देखा। उसने दाँत भींचे और ज़ोर से पैर पटक दिया।

“ठीक है! जो भी हो! इतना खास बनने का नाटक बंद करो!”

वह गुस्से में मुड़कर चली गई, उसकी एड़ियों की टक-टक फर्श पर तेज़ आवाज़ करती रही।

बार पर लौटकर वह ऊँचे स्टूल पर बैठ गई...

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