अध्याय 20 द किस

उस आदमी का लंबा-चौड़ा कद उसके ऊपर छा गया। वह उसे दरवाज़े और अपने बीच फँसा कर खड़ा था; उसकी काली आँखों में दबा हुआ ग़ुस्सा दहक रहा था।

बिना एक शब्द कहे उसने सिर झुकाया, और उसके तपते होंठ उसके होंठों पर आ पड़े।

वह चुंबन सज़ा जैसा था—हुक्म चलाने वाला, ज़बरदस्त, किसी भी विरोध को जगह न देने वाला—लगभग उ...

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