अध्याय 253 अभी के लिए स्थिर

सेलेस्टे एक तरफ खड़ी थी, फर्श पर पड़े अपने दादाजी के शरीर को घूरती हुई।

एक पल के लिए उसके चेहरे पर घबराहट की-सी लकीर उभरी।

वह हंगामा खड़ा करना चाहती थी। सब कुछ उलट-पुलट देना। ताकत अपने हाथ में लेना। उसने यह नहीं सोचा था कि वह सचमुच यूँ ढह जाएँगे।

लेकिन वह घबराहट बस कुछ सेकंड ही रही।

उसका चेहरा...

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