अध्याय 4 विवाह अनुबंध
"प्रेस्कॉट कॉरपोरेशन के वारिस घायल, चेहरा बिगड़ा, पैरों से अपाहिज"
वह चुभती हुई हेडलाइन मिरांडा की नज़र में अटक गई।
उसका फ़ोन भिनभिनाया। उसकी सबसे अच्छी दोस्त, कास्तीलो वायोला का संदेश था।
"मिरांडा! खबर देखी?"
"क्लिफ्टन प्रेस्कॉट—प्रेस्कॉट कॉरपोरेशन का वारिस। सुनने में आया है कि उसका चेहरा बिगड़ गया है और उसके पैर अब काम के नहीं रहे। अब प्रेस्कॉट परिवार उसे किसी भी तरह शादी करवाना चाहता है। जो भी उससे शादी करेगा, उसे मुआवज़े में सौ मिलियन देने की पेशकश कर रहे हैं!"
"सौ मिलियन! सबका दिमाग घूम गया है! लेकिन ये सब बातें ही हैं। भला कोई सच में ऐसे बदसूरत और अपाहिज आदमी से शादी करेगा?"
मिरांडा की उँगली के पोर उन तीन शब्दों पर ठहर गए—सौ मिलियन।
शादी तो बस दिखावा थी। उन्हें असल में एक बेहद कुशल देखभाल करने वाला चाहिए था।
लेकिन फिर भी—सौ मिलियन।
उस पैसे से लैंकेस्टर की नकदी की तंगी खत्म हो सकती थी। उसके भाई को अकेले सब कुछ नहीं उठाना पड़ता।
उसके सुन्न पड़े दिल में एक विचार ने जड़ पकड़ ली, और बेकाबू होकर फैलने लगा।
उसने गहरी साँस ली और कास्तीलो को जवाब भेजा।
"कास्तीलो, मेरा एक काम कर दे।"
"प्रेस्कॉट्स की तरफ से ये मामला जो संभाल रहा है, उसका कॉन्टैक्ट नंबर मुझे दिलवा दे।"
तीन दिन बाद।
प्रेस्कॉट कॉरपोरेशन की सबसे ऊपर वाली मंज़िल, सीईओ का दफ़्तर।
मिरांडा ने सलीकेदार बेज रंग का स्कर्ट-सूट पहन रखा था, बाल करीने से जूड़े में पिन किए हुए, चेहरे पर मेकअप नहीं था—और इसी से वह और भी निखरी, संजीदा लग रही थी।
उसने अपना पोर्टफोलियो बड़े सलीके से चौड़ी काले आबनूस की मेज़ पर रख दिया।
मेज़ के पीछे व्हीलचेयर पर एक आदमी बैठा था। उसके चेहरे के ऊपरी हिस्से पर चाँदी का मास्क था, जिससे सिर्फ पतले होंठ और तेज़, तराशी हुई जबड़े की रेखा दिखती थी।
बैठे-बैठे भी उसकी हुक्म चलाने वाली मौजूदगी को नज़रअंदाज़ करना नामुमकिन था।
"मिस्टर प्रेस्कॉट, मेरा नाम मिरांडा है। मैंने… से ग्रेजुएशन किया है…"
उसने शांत स्वर में अपना परिचय दिया, और एक-एक करके अपनी योग्यताएँ गिनाईं—पोषण विशेषज्ञ, उन्नत देखभाल प्रदाता, और मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता।
वह यहाँ शोपीस बनकर आने नहीं आई थी। वह एक समस्या हल करने आई थी।
"मेरा चेहरा बिगड़ चुका है। और मैं अपाहिज हूँ।"
आख़िर वह आदमी बोला—उसकी आवाज़ में हल्की-सी ठंडक थी, और उसने बीच में ही उसे रोक दिया।
"ये तुमको डराता नहीं?"
मिरांडा ने नज़र उठाई, और मास्क के पीछे छुपी आँखों की दिशा में सीधे देखा।
"ये तो बस चेहरा है। डरने जैसा क्या है?"
क्लिफ्टन की उँगलियाँ व्हीलचेयर के आर्मरेस्ट पर एक बार थपथपाईं—एक भद्दी-सी, मद्धम आवाज़ हुई।
"मेरा शादी करने का कोई इरादा नहीं है।"
"तुम जा सकती हो।"
यह साफ़-साफ़ रुख़सत कर देना था।
मिरांडा ने अपनी मुट्ठियाँ भींच लीं। "मुआवज़े में सौ मिलियन" वाला वाक्य उसके दिमाग में घूमता रहा।
वह जा नहीं सकती थी।
"मैं यहाँ रोमांस की बात करने नहीं आई हूँ, मिस्टर प्रेस्कॉट।"
वह एक क़दम आगे बढ़ी। आवाज़ नरम थी, लेकिन उसके भीतर की दृढ़ता बिल्कुल डगमगाई नहीं।
“हम कॉन्ट्रैक्ट मैरिज कर सकते हैं।”
“मैं आपके दादाजी के शादी के दबाव से निपटने में आपकी मदद करूँगी। और मैं पत्नी की ज़िम्मेदारियाँ निभाऊँगी—आपकी रोज़मर्रा की ज़रूरतों का ख़याल रखूँगी।”
“मुझे बस एक ही चीज़ चाहिए।”
“मुआवज़ा। पूरा का पूरा—एक-एक पैसा।”
क्लिफ़्टन की उँगलियों की थपथपाहट रुक गई। उसके होंठों पर जैसे हल्की-सी मुस्कान आई, और लहजे में मनोरंजन की झलक थी।
“तो तुम पैसे के लिए आई हो?”
उसकी नज़रें ऐसी थीं मानो उसकी रूह तक को पढ़ लेती हों।
मिरांडा ने बिना पलक झपकाए उसकी आँखों में आँखें डाल दीं।
“हाँ।”
ऑफिस में सन्नाटा छा गया।
काफ़ी देर बाद, क्लिफ़्टन ने धीमे-धीमे कहा—
“ठीक है।”
वह रुका, और उसकी आवाज़ अचानक बर्फ़ जैसी ठंडी हो गई।
“लेकिन याद रखना। अपनी हद में रहना। ऐसे ख़याल मत पालना जो नहीं पालने चाहिए।”
मिरांडा के होंठों पर हल्का-सा वक्र उभरा।
“चिंता मत कीजिए, मिस्टर प्रेस्कॉट। मैं समझती हूँ।”
आधे घंटे बाद, एक सेक्रेटरी तैयार किया हुआ समझौता लेकर अंदर आई।
मिरांडा ने आख़िरी पन्ने पर अपना नाम कर दिया।
सरकारी दफ़्तर के बाहर।
उसके हाथ में फिर वही सफ़ेद शादी का सर्टिफ़िकेट था। मगर इस बार उसके बगल में खड़ा आदमी अलग था।
पूरी प्रक्रिया के दौरान क्लिफ़्टन ने एक शब्द नहीं कहा था।
सरकारी दफ़्तर से बाहर निकलते ही मिरांडा रुक गई।
“मुआवज़ा कब ट्रांसफ़र होगा?”
क्लिफ़्टन अपनी व्हीलचेयर पर था, और एक सहायक उसे काली रोल्स रॉयस की तरफ़ धकेल रहा था।
उसने ज़रा-सा सिर घुमाया। धूप में मास्क ठंडा-सा चमक उठा।
“मेरी सेक्रेटरी उसे पहले ही प्रोसेस कर रही है।”
उसने झटपट एक फ़ोन नंबर और एक पता बता दिया।
“ये मेरा नंबर है, और ये मेरा घर। अपना सामान पैक करो और वहीं शिफ़्ट हो जाओ।”
इतना कहकर सहायक ने उसे गाड़ी में बैठा दिया।
दरवाज़ा बंद हुआ और कार आगे बढ़ गई।
मिरांडा नए-नवेले शादी के सर्टिफ़िकेट को पकड़े रही—उसे लग रहा था जैसे वह सपना देख रही हो।
कार की पिछली सीट पर—
क्लिफ़्टन ने हाथ उठाया और यूँ ही बेपरवाही से चेहरे से मास्क उतार दिया।
उसके नीचे बेदाग़, बेहद ख़ूबसूरत चेहरा था। घनी भौंहें, तीखी आँखें, ऊँची नाक—किसी भी फ़िल्मी सितारे से ज़्यादा नज़र खींच लेने वाला।
विकृति का नामोनिशान तक नहीं था।
उसने अपनी लंबी टाँगें सलीके से क्रॉस कीं। बैठने का ढंग ढीला-सा, सहज था। वह किसी भी तरह से अपाहिज नहीं लगता था।
“हह।”
उसके होंठों से हल्की-सी हँसी फिसल गई।
“दिलचस्प।”
उसने उस सफ़ेद शादी के सर्टिफ़िकेट को ऐसे उछालकर परे फेंक दिया जैसे वह कूड़ा हो—और वह बगल की खाली सीट पर जा गिरा।
उसने आगे वाली सीट पर बैठे सहायक से कहा, “मुझे एस्टेट ले चलो।”
“और वो चीज़ मेरे दादाजी को दे देना। कहना—उनका काम पूरा हो गया।”
