अध्याय 46 यह मेरी माफी है

मिरांडा ने मन ही मन ठहाका-सा लगाया। जब उसने फिर सिर उठाकर देखा, तो उसकी सारी कड़वाहट गायब थी—उसकी जगह बर्फ़-सी बेरुख़ी आ चुकी थी।

उसने होंठों पर हल्की-सी मुस्कान खींची और सपाट लहजे में बोली, “अच्छा? चलो, उम्मीद है तुम दोनों का काम जल्द बन जाए।”

फिर उसकी आँखों में शरारत की हल्की चमक आई, और वह पलटकर...

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