अध्याय 5 द आर्गुमेंट
सरकारी दफ़्तर के बाहर, मिरांडा ने एक टैक्सी ली और घर चली आई।
जैसे ही वह दरवाज़े के भीतर कदम रखी—जूतों की फीते तक खोलने नहीं पाई थी—कि एक तीखी बहस की आवाज़ दीवार की तरह उससे टकराई।
“डोमिनिक! क्या तुम्हारा दिमाग़ फिर गया है? ये मिरांडा के बिल्कुल नए कपड़े हैं, उसने अभी तक पहने भी नहीं! तुम्हें किस हक़ से ये सब उस एहसान-फ़रामोश लड़की को देने का अधिकार है!”
उसकी माँ, अराबेला की आवाज़ ग़ुस्से से काँप रही थी।
मिरांडा का दिल कस गया। वह तेज़ी से ड्रॉइंग रूम की तरफ़ बढ़ी।
सोफ़े पर एरियाना बैठी थी—मिरांडा की अलमारी से निकाले गए ब्रांडेड कपड़े और हैंडबैगों का ढेर बाँहों में जकड़े हुए—चेहरे पर बेबसी के आँसू। उसके पिता डोमिनिक, एरियाना के सामने ढाल बनकर खड़े थे और अराबेला से भिड़े हुए थे।
“आवाज़ नीचे रखो! एरियाना अभी-अभी सदमे से गुज़री है। उसे डरा मत दो!”
“मैं उसे डरा रही हूँ?” अराबेला ग़ुस्से से काँप रही थी, डोमिनिक की नाक की तरफ़ उँगली ताने। “तुम्हारी बेटी का मिसकैरेज हुआ है, उसका तलाक़ हुआ है! और तुम—उसके पिता—ने उसे देखने तक की ज़हमत नहीं उठाई! उल्टा, जिस इंसान ने उसकी ज़िंदगी बर्बाद की, उसे अपने घर में ले आए हो और उस पर लाड़ लुटा रहे हो? डोमिनिक, तुम्हारे भीतर ज़रा भी दिल बचा है?”
डांट से डोमिनिक का चेहरा लाल पड़ गया, मगर वह ज़िद पर अड़ा रहा।
“ये सब बकवास है! एरियाना तुम्हारी बहन की इकलौती बेटी है! मैं तो बस तुम्हारी ख़ातिर उसका ख़याल रख रहा हूँ!”
यह सुनते ही एरियाना ने मौका लपक लिया। वह दयनीय ढंग से रोने लगी और धीमी, कमज़ोर आवाज़ में अराबेला से बोली।
“मौसी, प्लीज़ ग़ुस्सा मत होइए। सब मेरी गलती है।”
“अपहरण के बाद मैं बहुत डर गई थी। पास में अपना कोई नहीं था, तो मैंने सोचा आपके पास आ जाऊँ। मुझे बस आपके करीब रहना था।”
“मुझे नहीं पता था कि आप मुझे यहाँ नहीं चाहतीं।”
वह सिसकती हुई, कपड़ों को और कसकर पकड़ते हुए खड़ी हो गई।
“अगर यही बात है, तो मुझे चले जाना चाहिए। वैसे भी मेरा अपना कोई बचा नहीं है। मैं जहाँ भी जाऊँ, क्या फ़र्क पड़ता है।”
उसके इस चालाक बयान ने डोमिनिक का ग़ुस्सा भड़का दिया।
वह मुड़कर अराबेला को घूरने लगा।
“ख़ुद को देखो! एक बड़ी औरत होकर एक बच्ची पर चढ़ बैठी हो! क्या यही बड़ों का तौर-तरीका होता है!”
“पापा, ये ठीक नहीं है। वो मेरी ही उम्र की है। बच्ची तो बिल्कुल नहीं।”
दहलीज़ की ओर से एक ठंडी आवाज़ आई।
मिरांडा एक-एक कदम रखती हुई अंदर आई। ठीक समय पर उसने अपनी माँ को डगमगाते देखा—चेहरा सफ़ेद पड़ा हुआ।
वह दौड़कर आगे बढ़ी और अराबेला को थाम लिया।
“माँ, आप ठीक हैं?”
फिर उसने ऊपर देखा—उसकी नज़र छुरे की तरह तेज़, सीधे एरियाना पर टिक गई।
“जो पकड़ा है, नीचे रखो।”
“वो कपड़े, वो बैग—मैं उन्हें काटकर कुत्तों को खिला दूँ, लेकिन तुम्हारे जैसी को नहीं दूँगी।”
मिरांडा के दिमाग़ में तस्वीरें कौंध गईं।
जब से एरियाना उनके घर आई थी, माँ उसे सिर-आँखों पर बैठाती आई थी—आख़िर वह उसकी छोटी बहन की इकलौती बेटी जो थी।
मिरांडा के पास जो कुछ था, एरियाना उससे कभी वंचित नहीं रही।
ब्रांडेड कपड़े, लिमिटेड एडिशन हैंडबैग—वह माँगती और माँ कभी मना नहीं करतीं।
और उसने उस मेहरबानी का बदला कैसे चुकाया?
उसके पति को फँसाकर। और अब उसकी माँ को तड़पा-तड़पा कर मार डालने की कोशिश करके।
मिरांडा का चेहरा पल-पल और सख़्त होता गया।
वह एरियाना को इस घर से एक चीज़ और नहीं ले जाने देगी।
मिरांडा का अड़ियल रवैया देखकर डोमिनिक आग-बबूला हो उठा।
“मिरांडा! क्या यही तरीका है अपनी कज़िन से बात करने का! तुम हाथ से निकल गई हो!”
उसने हाथ उठाया, मिरांडा के गाल पर थप्पड़ मारने के लिए।
चटाक!
ड्रॉइंग रूम में एक तेज़ थप्पड़ गूँज उठा।
लेकिन चोट मिरांडा को नहीं लगी।
अराबेला ने—कहाँ से आई ताक़त, पता नहीं—डोमिनिक के गाल पर जोरदार तमाचा जड़ दिया था।
“डोमिनिक! मेरी बेटी पर हाथ उठाकर दिखाओ, फिर देखना क्या होता है!”
अराबेला की आँखें लाल थीं—अपने बच्चे की रक्षा करती शेरनी जैसी।
“ये मेरा घर है! मेरा आशियाना! अब इस छोटी बदचलन को लेकर निकल जाओ!”
डोमिनिक ने अपना गाल पकड़ लिया, सदमे में अपनी पत्नी को घूरता रहा। कुछ देर बाद वह अराबेला को ज़हर भरी नज़र से घूरने लगा।
“ठीक है। बहुत ठीक! तुम दोनों जितना चाहे नाटक कर लो!”
यह कहकर उसने रोती हुई एरियाना का हाथ पकड़ा और उसे घसीटते हुए बाहर निकल गया, पीछे से दरवाज़ा ज़ोर से पटकता हुआ।
आखिरकार बैठक में सन्नाटा छा गया।
अरबेला का बदन ढीला पड़ गया। वह लगभग ढह ही गई।
“मॉम!” मिरांडा ने झटपट उसे संभालकर सोफ़े पर बैठा दिया।
अरबेला ने बेटी का हाथ कसकर पकड़ लिया, और आखिरकार उसके आँसू गालों पर बह निकले।
“सब मेरी गलती है। सब कुछ मेरी ही गलती।”
“मुझे कभी उस पर तरस नहीं खाना चाहिए था और उसे अपने घर में नहीं लाना चाहिए था। और अब देखो, हमने किसे पाल-पोस दिया—एक एहसान-फ़रामोश बदजात!”
वह पछतावे से भरी हुई, अपनी छाती पीटने लगी।
“और तुम्हारे पापा… उनका तो दिमाग ही सठिया गया है!”
सठिया गया?
मिरांडा मन ही मन कड़वाहट से हँस पड़ी।
एक चतुर कारोबारी, जिसने लैंकेस्टर को शून्य से खड़ा करके शेयर बाज़ार में लिस्टेड कंपनी बना दिया—वह सठिया कैसे सकता था?
ज़रूर कोई और वजह थी।
लेकिन बाहर से उसने बस माँ को नरमी से ढाढ़स बँधाया।
“मॉम, चलिए अस्पताल चलते हैं। आपकी सेहत की मुझे चिंता हो रही है।”
“ज़रूरत नहीं। मैं ठीक हूँ,” अरबेला ने हाथ हिला दिया। “बस मन बहुत दुखी है। थोड़ा आराम कर लूँगी तो ठीक हो जाऊँगी।”
माँ को कमरे तक ले जाकर आराम से लिटाने के बाद मिरांडा अपने कमरे में लौट आई।
जैसे ही वह बैठी, उसका फ़ोन भिनभिना उठा।
एरियाना का संदेश था।
एक फोटो, साथ में चिढ़ाने वाला कैप्शन—
“कज़िन, अंकल मुझे कितना अच्छा रखते हैं। अभी-अभी मेरे लिए एक विला खरीद दिया और ढेर सारे गिफ्ट्स भी दिए। बुरा मत मानना, ठीक है?”
फोटो में एक बेहद शानदार तरीके से सजा विला का लिविंग रूम था; सेंटर टेबल पर महंगे ब्रांडों के शॉपिंग बैग्स भरे पड़े थे।
लेकिन मिरांडा की नज़र एरियाना के पीछे, बैकग्राउंड में रखी एक चीज़ पर अटक गई—खुला हुआ प्रॉपर्टी परचेज़ एग्रीमेंट।
क्या उसके पापा पर गबन के आरोप में सस्पेंशन और जाँच नहीं चल रही थी?
कंपनी का कैश फ़्लो तो लगभग टूट चुका था। फिर एरियाना के लिए विला खरीदने के पैसे कहाँ से आए?
उसके दिमाग में तुरंत एक बेधड़क योजना बन गई।
मिरांडा ने गहरी साँस ली और डॉमिनिक को कॉल किया; उसकी आवाज़ में कोई भाव नहीं झलका।
“डैड, आज रात डिनर पर घर आ जाइए। क्रिश्चियन भी रहेगा।”
…
डिनर टेबल पर माहौल घुटन भरा था।
मिरांडा ने धीरे से अपना फ़ोन घूमने वाली ट्रे पर रखा और उसे डॉमिनिक की तरफ सरका दिया।
एरियाना की डींग भरी सोशल मीडिया पोस्ट सबके सामने साफ़ दिख रही थी।
“डैड, आप कज़िन एरियाना पर कितने मेहरबान हैं।”
उसने जान-बूझकर कहा; लहजे में हल्का-सा ताना था।
“लेकिन आप ऐसे पक्षपात नहीं कर सकते। क्रिश्चियन और मुझे भी विला चाहिए। कुछ खास नहीं—बस उसके वाले से कुछ-कुछ करोड़ महंगे।”
डॉमिनिक का चेहरा तुरंत उतर गया।
“यह बकवास है! मेरे पास इतना पैसा कहाँ से आएगा!”
“ओह?” मिरांडा ने भौंह उठाई।
“तो फिर उसके विला के पैसे कहाँ से आए? डैड, आप नहीं चाहेंगे कि लोग बातें बनाएं कि आप अपने बच्चों से ज़्यादा परायों पर लुटाते हैं।”
वह रुकी, फिर हल्के से जोड़ दिया—
“लोग तो यह भी सोच सकते हैं कि एरियाना आपकी नाजायज़ बेटी है।”
“बकवास बंद करो!” डॉमिनिक ऐसे उछला जैसे किसी ने बिल्ली की पूँछ पर पैर रख दिया हो। “मुझे बस उस बेचारी पर तरस आ गया था, अकेली जो है!”
“अगर बात तरस की है, तो फिर आपके बच्चे होने के नाते हमें भी तो आपका बोझ बाँटना चाहिए।”
मिरांडा ने कहीं से दो दस्तावेज़ निकाले और मेज़ पर पटक दिए।
“क्रिश्चियन और मैंने दो विला पहले ही पसंद कर लिए हैं। दोनों एक-दूसरे के बिल्कुल पास हैं। परिवार के लिए एक-दूसरे का ख्याल रखना आसान रहेगा।”
“डैड, साइन कर दीजिए।”
“आप साइन कर देंगे तो कल हम बाकी कागज़ी काम निपटा देंगे।”
अरबेला और क्रिश्चियन ने तुरंत बात पकड़ ली और दोनों तरफ से बोल पड़े।
“हाँ, साइन कीजिए! हम ये नहीं होने दे सकते कि बाहर वाले सोचें लैंकेस्टर के बच्चों की कीमत किसी दूसरे सरनेम वाले से कम है!”
“डैड, मिरांडा सही कह रही है। ये बात बाहर गई तो लैंकेस्टर परिवार की इज़्ज़त पर बुरा असर पड़ेगा।”
तीनों के एक साथ घेर लेने से डॉमिनिक का चेहरा लाल से सफेद हो गया। उसका पेन एग्रीमेंट के ऊपर ठहरा रहा, नीचे उतरने का नाम नहीं ले रहा था।
मिरांडा उसे देखती रही; उसकी मुस्कान और चौड़ी होती गई।
“चलो, डैड। साइन कर दीजिए। आप नहीं चाहेंगे कि बातें बनकर आपकी इज़्ज़त मिट्टी में मिल जाए।”
