अध्याय 6 एक चुम्बन

मिरांडा ने दोनों हस्ताक्षरित संपत्ति-समझौते संतुष्ट मुस्कान के साथ अपनी ओर खींच लिए।

हालाँकि उसके पिता पर जाँच पूरी होने तक निलंबन लगा था, लेकिन इतने सालों तक उन्होंने लैंकेस्टर पर राज किया था। कौन जाने उन्होंने कितना पैसा छिपा रखा हो।

इस वक्त उनसे सीधे टकराना समझदारी नहीं थी।

उसे सच में एरियाना का शुक्रिया अदा करना चाहिए था—इतना परफेक्ट मौका देने के लिए।

कल, दो विला ट्रांसफर होते ही, वह इसी सुराग के सहारे किसी को लगाकर अपने पिता के रहस्यमयी पैसों के स्रोत की जाँच करवा सकती थी।

डॉमिनिक दोनों समझौतों को ऐसे घूर रहा था, जैसे किसी ने उसके शरीर से मांस के टुकड़े काट लिए हों। उसने खाना नाम मात्र छुआ, फिर काले चेहरे के साथ अपने कमरे में लौट गया।

मिरांडा को परवाह नहीं थी।

अगली सुबह, उसे एक अनजान नंबर से कॉल आई।

दूसरी तरफ क्लिफ्टन की गहरी, बेपरवाह आवाज़ थी।

“मेरे दादाजी तुमसे मिलना चाहते हैं। आज डिनर के लिए प्रेस्कॉट एस्टेट आ जाओ।”

“और जब तक कुछ अनहोनी नहीं होती, अब से तुम्हें मेरे साथ ही रहना होगा।”

एक सौ मिलियन के मुआवज़े का सोचते ही मिरांडा ने एक पल भी नहीं झिझकी।

“ठीक है।”

फोन रखते ही उसने मन ही मन सोचा कि मुआवज़े के लिए क्लिफ्टन से हुई अचानक शादी की बात अभी माँ और भाई को नहीं बतानी चाहिए।

उन्हें बेवजह चिंता में डालने का क्या फायदा।

वह बहाना तैयार करके अपनी माँ के कमरे में गई।

“माँ, अब जब मेरा हैरिसन से तलाक हो गया है, मुझे थोड़ा अकेले रहने की जरूरत है ताकि दिमाग साफ हो सके। मैं कुछ दिन डाउनटाउन वाले अपार्टमेंट में रहूँगी।”

अरबेला ने तुरंत हामी भर दी।

“ठीक है। अकेले रहोगी तो तुम्हें सुकून मिलेगा। यहाँ रहकर अपने पक्षपाती पिता को बार-बार देखकर फिर से परेशान होने से तो बेहतर ही है।”

उसी दोपहर, प्रेस्कॉट एस्टेट में।

वह आलीशान हवेली हर मोड़ पर सादगी भरी शानो-शौकत बिखेर रही थी।

मिरांडा टैक्सी से उतरी ही थी कि उसने देखा—क्लिफ्टन व्हीलचेयर पर बैठा, मुख्य द्वार पर उसका इंतज़ार कर रहा था।

दोनों एक के बाद एक अंदर गए। ड्रॉइंग रूम में उनकी मुलाकात प्रेस्कॉट परिवार के मुखिया, यानी क्लिफ्टन के दादाजी से हुई।

मिस्टर प्रेस्कॉट तेज़-तर्रार और फुर्तीले थे, आँखें बहुत पैनी थीं—मगर मिरांडा को देखते ही उनका चेहरा नरम पड़ गया।

“तो तुम मिरांडा हो। अच्छी बच्ची। तस्वीरों से भी ज़्यादा खूबसूरत।”

उन्होंने संतुष्टि से सिर हिलाया, फिर बगल में खड़े क्लिफ्टन को घूरा।

“अगर इस लड़के ने कभी तुम्हें परेशान किया, तो मुझे बताना। मैं इसे सीधा कर दूँगा!”

मिरांडा मुस्कुराई और धीमे से बोली, “दादाजी, क्लिफ्टन मेरे साथ बहुत अच्छा व्यवहार करते हैं।”

क्लिफ्टन के दादाजी को उसका विनम्र जवाब साफ पसंद आया। उन्होंने उसे अपने करीब खींच लिया और सवालों की बरसात कर दी।

“तुम दोनों की मुलाकात कैसे हुई?”

“मिरांडा, तुम्हें सच में कोई आपत्ति नहीं—मेरे पोते से शादी करने में, जबकि वह… दिव्यांग है?”

मिरांडा ने अनायास क्लिफ्टन की तरफ देखा।

मास्क के पीछे उसका चेहरा पढ़ा नहीं जा रहा था। उसने कुछ नहीं कहा, मदद करने का कोई इरादा नहीं दिखाया।

मिरांडा के पास साथ निभाने के अलावा कोई रास्ता नहीं था।

उसने आँखें झुका लीं, शर्मीला सा अंदाज़ बना लिया।

“दादाजी, हमारे सर्कल में क्लिफ्टन हमेशा से हर रईस घराने की लड़की के लिए आदर्श पति रहे हैं। सच कहूँ तो मुझे वे बहुत समय से पसंद हैं।”

“इसलिए… उनसे शादी करके मुझे कोई पछतावा नहीं है।”

वह अपने मन में बार-बार दोहरा रही थी कि यह सब एक सौ मिलियन के मुआवज़े के लिए है—सिर्फ मिस्टर प्रेस्कॉट को संतुष्ट करने के लिए।

उसे डर था कि क्लिफ्टन के दादाजी उसकी बात पर यकीन न करें, इसलिए उसने पूरी बाज़ी लगा दी। वह थोड़ा किनारे हुई और क्लिफ्टन के दादाजी के सामने ही झुककर क्लिफ्टन के ठंडे मास्क पर हल्का सा चुंबन रख दिया।

“मैं उनका अच्छे से ख्याल रखूँगी।”

व्हीलचेयर पर बैठे क्लिफ्टन ने साफ तौर पर मिरांडा की इस हरकत की उम्मीद नहीं की थी। उसने नजरें नीचे कर लीं, अपना भाव छिपाते हुए।

यह देखकर क्लिफ्टन के दादाजी की मुस्कान और गहरी हो गई। वे पूरी तरह संतुष्ट थे।

“अच्छा, अच्छा! तुम तो बहुत ही बढ़िया बहू हो!”

उन्होंने तुरंत बटलर को एक फोल्डर लाने का इशारा किया और वह मिरांडा को थमा दिया।

“यह मेरी तरफ से स्वागत-भेंट है। दक्षिणी ज़िले में एक विला।”

मिरांडा ने तुरंत मना किया। “दादाजी, यह बहुत ज़्यादा है। मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकती।”

लेकिन उसकी बात पूरी भी नहीं हुई थी कि क्लिफ्टन ने अचानक बोल दिया।

“अगर दादाजी दे रहे हैं, तो ले लो।”

क्लिफ्टन की नजरें मिरांडा पर टिक गईं।

मिरांडा ने फिर इनकार नहीं किया।

जोड़े के इस अपनत्व भरे मेलजोल को देखकर क्लिफ्टन के दादाजी खुशी से खिल उठे और उन्होंने फैसला सुना दिया।

“जब तुम दोनों इतनी अच्छी तरह निभा रहे हो, तो आज रात मत जाना। यहीं एस्टेट में रुको!”

"मैंने पहले ही नौकरों से एक कमरा तैयार करवा दिया है।"

मिरांडा और क्लिफ्टन ने एक-दूसरे की ओर देखा। दोनों ने ही इंकार नहीं किया।

...

उस शाम, खाने के बाद।

मिरांडा बाथरूम से बाहर निकली—उसके शरीर से अभी भी गर्म भाप उठ रही थी।

उसने नज़र उठाई तो देखा, क्लिफ्टन पलंग के हेडबोर्ड से टिककर कुछ कागज़ात पकड़े हुए था।

खिड़की से चाँदनी भीतर बह रही थी और उसकी नकाब पर पड़ रही थी।

मिरांडा जानती थी कि इस कॉन्ट्रैक्ट वाली शादी में उसकी ज़िम्मेदारी उसकी देखभाल करना है। वह बिस्तर की ओर बढ़ी।

"काफ़ी रात हो गई है। आपको आराम करना चाहिए। जागते रहना आपकी टाँग की चोट के लिए अच्छा नहीं है।"

वह क्लिफ्टन की ओर हाथ बढ़ाने लगी।

लेकिन आदमी ने झट से कागज़ात पीछे खींच लिए। कागज़ों से मिरांडा का हाथ उछलकर हट गया और अनजाने में उसके चेहरे की नकाब से टकरा गया।

हल्की-सी क्लिक की आवाज़ हुई, और नकाब गिर गई।

घनी भौंहें, तीखी आँखें, ऊँची नाक की हड्डी।

मिरांडा का दिल एक धड़कन के लिए रुक-सा गया। उसका चेहरा तो बिगड़ा हुआ नहीं था?

और यह चेहरा तो बिल्कुल उसी आदमी जैसा था जिसने उसे उस सुनसान गोदाम में बचाया था!

लेकिन उसने तुरंत उस ख़याल को झटक दिया।

नामुमकिन।

क्लिफ्टन तो प्रेस्कॉट परिवार का वारिस था। उसका तो हाल ही में कार एक्सिडेंट हुआ था। वह ऐसी जगह पर कैसे हो सकता था?

उसने खुद को संभाला और क्लिफ्टन के और क़रीब चली गई।

"आपका चेहरा बिगड़ा हुआ नहीं है?" मिरांडा की आवाज़ में हैरानी थी।

"ये तुम्हारी चिंता नहीं है।" क्लिफ्टन की आवाज़ ठंडी थी।

उसके सामने बैठे आदमी को देखते हुए मिरांडा सोचने लगी कि वह अपना असली चेहरा क्यों छिपा रहा है।

क्या कोई ख़तरा है?

"क्लिफ्टन, अब जब मुझे आपका राज़ पता चल गया है, क्या आपको डर नहीं कि मैं लोगों को बता दूँगी?"

"मुझे धमकी दे रही हो?" क्लिफ्टन की आवाज़ में खतरनाक धार थी।

मिरांडा पीछे हटकर थोड़ा फासला बनाना चाहती थी।

लेकिन वह हिल भी नहीं पाई थी कि अचानक एक गर्म हथेली ने उसकी कलाई जकड़ ली।

दुनिया घूम-सी गई। ज़ोरदार खिंचाव ने उसे आगे खींच लिया, और वह सीधे आदमी की मजबूत गोद में जा गिरी।

"तुम..."

वह शब्द ठीक से निकाल भी नहीं पाई थी कि उस आदमी का खूबसूरत चेहरा उसकी आँखों के सामने भर गया। उसके ठंडे होंठ जोर से उसके होंठों पर आ टिके।

चुंबन हुक्म चलाने जैसा था—इनकार की कोई गुंजाइश नहीं।

मिरांडा ने स्वाभाविक तौर पर छटपटाकर उसके सीने पर हाथ रखे।

"म्म... छोड़िए..."

पॉप।

संघर्ष में उसकी नाइटी के आगे का एक बटन खुल गया।

आदमी ने जैसे यह देख लिया। वह पल भर ठहरा, फिर और भी तीव्रता से उसे चूमने लगा।

काफी देर बीत गई—इतनी देर कि मिरांडा को लगा वह घुट जाएगी—तब कहीं जाकर क्लिफ्टन ने उसे छोड़ा।

उसकी नज़र गहरी हो गई, जब उसकी दृष्टि मिरांडा की छाती पर खुलकर दिख रहे फीके-से उभार पर जा ठहरी। उसके गले का उभार हल्का-सा ऊपर-नीचे हुआ।

मिरांडा ने देख लिया वह कहाँ देख रहा है। उसने झट से बाहों को सीने पर बाँध लिया, आवाज़ में गुस्सा था।

"ये समझौते में नहीं था। मैं अपना शरीर नहीं बेच रही!"

औरत की घबराई हुई हालत देखकर क्लिफ्टन के भीतर शरारत जागी।

"क्या, तुम्हें लगता है सौ मिलियन इतनी आसानी से मिल जाएँगे?"

मिरांडा के चेहरे की लाली थोड़ी कम हुई। "लेकिन हमारा तय हुआ था..."

क्लिफ्टन ने बीच में काट दिया। "रिलैक्स। मुझे तुम्हारी जैसी औरतों में दिलचस्पी नहीं है।"

मिरांडा ने भौंहें सिकोड़ लीं। "तो फिर आपने अभी मुझे किस क्यों किया?"

क्लिफ्टन ने मिरांडा को ऊपर से नीचे तक देखा।

मानना पड़ा—यह औरत वाकई बहुत खूबसूरत थी।

वह उसके कान के पास झुका, उसकी आवाज़ भारी हो गई।

"दादाजी ने अभी किसी को दरवाज़े पर भेजा था। मुझे तुम्हें बताने का वक्त नहीं मिला।"

मिरांडा तुरंत समझ गई।

यह बस अभिनय था।

वह ढीली पड़ गई, राहत की सांस ली।

बस एक किस। वह कुछ नहीं खो रही थी।

उसे मानना पड़ा, क्लिफ्टन का चेहरा बेदाग़—बिल्कुल परफ़ेक्ट था।

और अभी जब वह छटपटा रही थी, उसने उसका सीना और पेट के मांसल हिस्से महसूस किए थे। मांसपेशियाँ सख्त और भरी हुई थीं। अहसास... अच्छा था।

मिरांडा ने अपने गर्म गाल थपथपाए, उसकी गोद से उतरकर जल्दी से बिस्तर के दूसरी तरफ चली गई। वह लेट गई और कंबल सिर तक ओढ़ लिया।

क्लिफ्टन ने कंबल के नीचे बने छोटे-से उभार को देखा, अपने शरीर में उठती गर्मी को दबाते हुए।

"ये आख़िरी बार नहीं होगा। चाहे लोगों के सामने हो या अकेले में—ऐसे बहुत मौके आएँगे जब तुम्हें मेरे क़रीब रहना पड़ेगा। इसकी आदत डाल लो।"

कंबल के भीतर से मिरांडा ने घुटी-सी आवाज़ में हामी भरी।

कुछ पल बाद, क्लिफ्टन ने व्हीलचेयर के आर्मरेस्ट पर हाथ टिकाए और स्थिरता से खड़ा हो गया। वह सीधे बाथरूम की ओर चल पड़ा।

मिरांडा, पीठ किए और सिर पर कंबल ओढ़े, स्वाभाविक रूप से यह नहीं देख पाई।

उसके पीछे खड़े आदमी की टाँगों में भरपूर ताकत थी। वह किसी भी तरह से अपंग नहीं लगता था।

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