अध्याय 63 क्लिफ्टन एक भगवान की तरह उतरता है

मिरांडा ने धड़कते सिर को ज़ोर से झटका। उसकी नज़र के सामने सब कुछ मरोड़ खा रहा था, डोल रहा था। दरवाज़े पर पीछे से रोशनी में खड़ा वह साया इतना जाना-पहचाना लगा कि उसका दिल काँप उठा।

वह क्लिफ्टन था।

लेकिन वह खड़ा कैसे हो सकता था?

यह ज़रूर कोई भ्रम होगा। वह अपनी आख़िरी हद पर पहुँच चुकी थी, तभी तो यह न...

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