अध्याय 69 दादाजी के अवशेष

रात घुप्प अँधेरी थी।

जब क्लिफ्टन उस हवेली में लौटा, तो उसके साथ एक सिहरन भरा-सा साया भी चला आया था। तब तक काफ़ी रात हो चुकी थी।

वह नौकरों से बचता हुआ सीधे ऊपर चला गया।

जैसे ही उसने मास्टर बेडरूम का दरवाज़ा धकेलकर खोला, उसके आगे बढ़ते कदम लगभग न के बराबर ठिठक गए।

उसे लगा था कि इतनी देर हो चु...

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