अध्याय 86 मैं एक सामान्य आदमी हूँ, बेशक मेरी शारीरिक प्रतिक्रियाएँ हैं

मिरांडा का दिमाग़ एकदम खाली हो गया।

उसके पैर का तलवा ऐसा जल उठा, जैसे दाग़ने वाली गरम सलाख़ ने छू लिया हो। वह झट से सामने खड़े आदमी की ओर देखने लगी।

और अनजाने में ही उसकी नज़र उन गहरी, समंदर जैसी आँखों में जा धँसी।

पतली ड्रेस पैंट के आर-पार, तलवे के नीचे की वह सख़्त, जलन भरी अनुभूति इतनी साफ़ थी...

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