अध्याय 209

"क्या हुआ? अभी से मन डोल गया?" लिस्बेथ जानती थी कि ऐसा नहीं है, मगर सेबास्टियन को छेड़ने से वह खुद को रोक नहीं पाई।

सेबास्टियन के माथे पर हल्की शिकन आई और वह मुड़कर उसकी तरफ देखने लगा—आँखें गहरी, पढ़ी न जा सकने वाली। "लिस्बेथ, कभी-कभी मुझे लगता है मैं… चोर हूँ।"

"क्या?"

"चोर—जो चीज़ें चुरा लेता ह...

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