अध्याय 250

सुबह-सुबह का वक्त था। लिसबेथ बाथरूम में खड़ी आईने में अपना चेहरा देख रही थी। सब कुछ सामान्य लग रहा था—बस गर्दन पर पड़े दो लाल निशान छोड़कर।

वे ऐसे लग रहे थे मानो सीधे-सीधे गुनाह की गवाही दे रहे हों।

उसने होंठ भींच लिए। बीती रात की दीवानगी याद आते ही गालों में गर्मी दौड़ गई।

एकदम पागलपन।

उसी पल ब...

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