अध्याय 264

सेबेस्टियन ने लिसबेथ की गर्दन से सटकर प्यार से नाक रगड़ी; उसकी साँस उसके कान को छूती हुई गुज़री। लिसबेथ को गुदगुदी-सी लगी, वह सिहरकर थोड़ा हट गई और मुड़कर सेबेस्टियन के चेहरे के भाव पढ़ने लगी। “तुम उसे पसंद क्यों नहीं करते?”

“उसके इरादे ठीक नहीं हैं।” सेबेस्टियन ने उसे बाँहों में लिए रखा, दोनों नरम...

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