अध्याय 275

देर रात।

कामकाजी डिनर निपटाकर लियोपोल्ड अपनी गाड़ी की पिछली सीट पर टिक गया। ड्राइवर बड़ी सफाई से गाड़ी चला रहा था, और उसी मुलायम रफ़्तार ने लियोपोल्ड को ऊंघने पर मजबूर कर दिया।

आधी नींद, आधी जाग में उसे एक जाना-पहचाना चेहरा दिखा।

“कहा था ना, इतना मत पिया करो। तुम कभी सुनते क्यों नहीं?” वही परिचित...

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