अध्याय 281

कियाना खिड़की के पास अकेली बैठी थी। मेज़ पर रखा लिफ़ाफ़ा, जिस पल से रखा गया था, तब से वैसे ही पड़ा था—अनछुआ। उसे नहीं पता था कि उसके अंदर क्या है, मगर उसके दिल में एक अनजाना-सा डर बैठा हुआ था।

जब तक उसकी कॉफी ठंडी नहीं पड़ गई और स्टाफ आकर यह नहीं कह गया कि कैफ़े बंद होने वाला है, तब तक कियाना अपनी ...

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