अध्याय 30

लिस्बेथ में छूटने की ताक़त नहीं बची थी, लेकिन उसे पता था कि अगर वह बेंटली के साथ चली गई, तो उसका खेल ख़त्म। उसकी आँखों में भद्दी नीयत साफ़ झलक रही थी।

उसने चीख़ने की कोशिश की, मगर गला—शराब से जैसे झुलस गया हो—से आवाज़ निकली ही नहीं।

बेबस होकर उसने बेंटली की कलाई पकड़ी और उसकी हैरान नज़रों से नज़र ...

लॉगिन करें और पढ़ना जारी रखें