अध्याय 31

दरवाज़े के पीछे से सेबास्टियन की आवाज़ आई।

“ओए, जाग रही हो?”

काफी देर की ख़ामोशी के बाद लिस्बेथ ने आखिरकार दरवाज़ा खोला। उसकी आँखें थोड़ी लाल थीं, और चेहरा भीगा हुआ था। उसने शर्मिंदा-सी मुस्कान दी।

“सॉरी, बस मुँह धो रही थी।”

“अच्छा हुआ उठ गई। नाश्ते के लिए नीचे आ जाओ।”

सेबास्टियन ने उसकी लाल आँ...

लॉगिन करें और पढ़ना जारी रखें