अध्याय 169

"तुम यहाँ क्यों हो?" कैटनिस किसी तरह बोल पाई—आवाज़ गले से निकलती एक कच्ची, खुरदुरी कराह थी। उसने उठकर बैठने की कोशिश की, मगर शरीर में जान नहीं थी; सिर एक ओर ढुलक गया ताकि वह उसे देख सके। कुछ देर बाद एक दूसरा सवाल उभरा। "मैं यहाँ कैसे पहुँची?"

सेड्रिक ने आखिरकार अपनी गोद में रखी किताब से नज़र उठाई, ...

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