अध्याय 193

सुबह-सुबह।

बिस्तर के पास रखी अलार्म घड़ी बज उठी। कैटनिस ने भौंहें सिकोड़ीं और आँखें बंद ही रखकर हाथ बढ़ाकर उसे बंद करने लगी—होश अभी पूरी तरह लौटा नहीं था। साँसें हल्की-हल्की चल रही थीं, तभी अचानक उसे किसी खुशबूदार चीज़ की महक आई।

वह ठिठकी, और जैसे ही दिमाग़ में बात बैठी, उसकी आँखें फट से खुल गईं। ...

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