अध्याय 209

भारी लकड़ी की कुर्सी पीछे को पलट गई। कोडी भी उसके साथ ही धड़ाम से नीचे गिर पड़ा और फर्श पर ज़ोरदार धमाके के साथ कुर्सी आ गिरी।

कोडी की उम्र अब ढल चुकी थी। उसका सिर सख़्त फर्श से टकराया, आँखों के आगे अँधेरा छा गया और उसके मुँह से दबी-दबी कराह निकल गई। वह बस टूटती-टूटती साँसें ही ले पा रहा था—इतनी ता...

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