अध्याय 243

कैटनिस ने जो दस्तावेज़ अभी-अभी मेज़ पर रखे थे, उन्हें झटके से उठाया—दिल में उमड़ रहे ग़ुस्से को किसी तरह काबू में रखने की कोशिश करती हुई। वह सेड्रिक से एक-एक शब्द चबाकर बोली, “सेड्रिक, इसका पछतावा मत करना।”

इतना कहकर वह मुड़ी और बाहर चली गई, जाते-जाते दरवाज़ा ज़ोर से पटक दिया।

सहायक दरवाज़े के पास...

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