अध्याय 99

रात स्याही जैसी काली थी। लग्ज़री स्पोर्ट्स कार शहर की चमक-दमक और ऐशो-आराम से भरी ऊँची इमारतों को पीछे छोड़ती हुई, उपनगरों की ओर जाने वाले हाईवे पर बड़ी नरमी से फिसलती चली जा रही थी।

बाहर शहर का शोर-शराबा धीरे-धीरे थमकर सन्नाटे में बदल गया। स्ट्रीटलाइटें तेज़ी से पीछे छूटतीं तो रोशनी की लंबी-लंबी लक...

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