अध्याय 42 अस्पताल में धूम्रपान न करना

पाउला को टोकने की हिम्मत किसी में नहीं थी।

उस खामोशी से, जो जैसे उसके हर शब्द पर मुहर लगा रही थी, उसका हौसला और बढ़ गया। वह बोलती चली गई—और पल भर को उस पुरानी सीख को भूल गई कि ज़ुबान पर लगाम न हो तो नाव भी डूब जाती है।

बाकी सब तमाशा देख रहे थे, चेहरों पर तृप्त-सी मुस्कान, और आँखों व होंठों पर छि...

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