अध्याय 31 पहचान की फुसफुसाहट

ज़ोई का चेहरा शर्मिंदगी से ऐंठ गया। वह काँपती उँगली से कीरा की ओर इशारा करते हुए बोली।

“तुम साफ़-साफ़ हमें ब्लैकमेल कर रही हो! तुम वही कीरा हो—बस लौट आई हो हमसे बदला लेने! ये मत समझना कि नाम-रूप बदल लेने से मैं तुम्हें पहचान नहीं पाऊँगी!”

उसकी भावनाएँ काबू से बाहर हो गईं और आख़िरकार उसने अपने मन क...

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