अध्याय 109

बाहर से वह किला बेहद भव्य और आलीशान दिखता था, लेकिन अंदर से उसकी हालत किसी ऐसे पुराने भवन जैसी थी जिसकी सौ साल से देखभाल न हुई हो।

हर तरफ़ मोटे जाले फैले थे और धूल ने हर सतह को ढक रखा था। एक कदम रखते ही साफ़ पदचिह्न बन जाता।

किले का अंदरूनी हिस्सा एक विशाल भूल-भुलैया जैसा था—टेढ़ी-मेढ़ी सीढ़ियाँ औ...

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