अध्याय 169

आरिया ने खुद को दिलासा देने की कोशिश की, और बेबस होकर अपने आँसू पोंछती रही।

लेकिन जितना वह पोंछती, उतना ही वे बहते जाते, यहाँ तक कि उसके हाथों पर आँसुओं के दाग छा गए।

खिड़की से आती गुनगुनी धूप आरिया को अपने उजाले में नहला रही थी, मगर उसका चेहरा फिर भी चादर की तरह सफेद पड़ा था।

“क्यों? मेरे दिल मे...

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