अध्याय 175

लौरा बुरी तरह टूट चुकी थी। अगर आरिया उसे इस हाल में देख लेती, तो भीतर ही भीतर अपनी हँसी रोक नहीं पाती।

जैसे ही लौरा मुलाक़ात वाले कमरे में दाख़िल हुई, उसकी नज़र अपनी माँ पर पड़ी—जिसे उसने न जाने कब से नहीं देखा था।

लौरा एक पल को जड़ हो गई, फिर दौड़कर उसके पास पहुँच गई।

“मुझे यहाँ से बाहर निकालो! ...

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