अध्याय 195

कोठरी की ख़ामोशी अचानक कदमों की आहट से टूट गई। लिंडा दीवार से टिककर बैठी हुई थी; उसने धीरे-धीरे आँखें खोलीं कि देखें कौन आया है।

दल का अगुवा आदमी टेढ़ी मुस्कान के साथ झुका, उकड़ूँ बैठकर लिंडा की पिंडली पर हाथ रख दिया।

“जान, आज कोई तुझे बचाने नहीं आने वाला। अब भी नहीं बोलेगी?”

लिंडा की आँखों में घ...

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