अध्याय 231

ज़ैकरी मुस्कुराया; उसके चेहरे पर लुईस पर भरोसे की चमक थी, ज़रा-सा भी शक नहीं।

ठुड्डी हाथ पर टिकाए उसकी आँखों में उत्सुकता झिलमिला उठी। “तो फिर मैं तुम्हारे तोहफ़े का इंतज़ार करूँगा।”

“मैं आपको निराश नहीं करूँगा, महाराज।”

“अब आगे है इस नीलामी की सबसे अहम पेशकश।”

मेज़बान की आवाज़ अचानक लुईस और ज़ै...

लॉगिन करें और पढ़ना जारी रखें