अध्याय 251

साइमन का चेहरा अजीब-सा बिगड़ गया, मगर वह फौरन अपनी वही पुरानी अटपटी शक्ल में लौट आया।

उसकी आवाज़ हमेशा की तरह चिढ़ाने वाली थी। “मैं और वो, करीब? ये ख़याल तुम्हारे दिमाग में आया कैसे? हम एक-दूसरे को फूटी आँख नहीं सुहाते। मौका मिले तो एक-दूसरे का गला ही घोंट दें।”

“अच्छा, अगर बात ये है तो रहने दे। फ...

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