अध्याय 296

कीटाणुनाशक की तीखी गंध साइमन् की नाक में भर गई।

उसकी पीठ से असहनीय जलन-सी उठ रही थी, जैसे दर्द की लपटें पूरे बदन में फैल रही हों—मन कर रहा था कि वह उछलकर बैठ जाए।

मगर वह हिल भी नहीं पा रहा था, उछलना तो दूर की बात थी।

उसने दाँतों के बीच से गाली दबाकर निकाली और आँखें खोलने की कोशिश की।

उसे बस चकाच...

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